“Phanu Dal Recipe”सामग्री (Ingredients):
गहत की दाल: 1 कप 200g लगभग (रात भर भीगी हुई)
हींग: 1 चुटकी
जखिया (Jakhya): आधा छोटा चम्मच (तड़के के लिए – यह पहाड़ी स्वाद देता है)
लहसुन: 5-6 कलियाँ (बारीक कटी हुई)
अदरक: 1 इंच का टुकड़ा
हरी मिर्च: 2-3
हल्दी पाउडर: आधा छोटा चम्मच
धनिया पाउडर: 1 छोटा चम्मच
नमक: स्वादानुसार
सरसों का तेल: 2 बड़े चम्मच
हरा धनिया: बारीक कटा हुआ
“Phanu Dal Recipe”बनाने की विधि (Method)
- दाल तैयार करें: सबसे पहले भीगी हुई गहत की दाल को पानी से निकालें और सिलबट्टे में थोड़ा दरदरा पीस लें
(आप चाहें तो मिक्सी में भी पीस सकते हैं पर सिलबट्टा में पीसने से इसका टेस्ट लाजबाव होगा ध्यान रहे इसको ज्यादा बारीक पेस्ट न बनाएं)
2. भूनें: एक लोहे की कड़ाही (अगर हो तो) में सरसों का तेल गरम करें। उसमें जखिया और हींग का तड़का लगाएं।
3. मसाले डालें: अब बारीक कटा हुआ लहसुन, अदरक और हरी मिर्च डालें। जब लहसुन हल्का सुनहरा हो जाए, तो इसमें हल्दी और धनिया पाउडर डालें
4. अब पिसी हुई दाल को कड़ाही में डालें और मध्यम आंच पर 5-7 मिनट तक अच्छी तरह भूनें।. (भूनने से दाल का कच्चापन निकल जाएगा और स्वाद बढ़ जाएगा )
5अब इसमें जरूरत के अनुसार गर्म पानी डालें। फाणू दाल को धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि वह गाढ़ी न हो जाए और दाल का रंग गहरा न दिखने लगे। .(यह प्रक्रिया इसे सामान्य दालों से अलग एक गाढ़ा और रिच टेक्सचर देती है)
6. अब ऊपर से नमक डालें और कटा हुआ हरा धनिया डालकर गरमा-गरम भात (चावल) के साथ परोस
“Phanu Dal Recipe” खास टिप्स : 1. पिसा हुआ नमक (Pisa Namak): सादे नमक की जगह, अगर आप इसमें धनिया-पुदीने या लहसुन वाला पहाड़ी पिसा हुआ नमक इस्तेमाल करेंगे, तो स्वाद कई गुना बढ़ जाएगा।
2. भंगजीरा (Bhangjeera): तड़के में लहसुन के साथ भंगजीरा के बीज डालने से इसमें एक बहुत ही सोंधी और नटी (nutty) खुशबू आती है, जो पहाड़ों में बहुत लोकप्रिय है।
3. फाणू दाल को लोहे की कड़ाही में बनाने से इसका स्वाद और रंग दोनों बढ़ जाता है
फाणू दाल की कुछ खास बातें
फाणू (Phanu) दाल सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और स्वास्थ्य का एक अनमोल खजाना है।
पारंपरिक स्वाद: इसे लोहे की कड़ाही में बनाने से इसका रंग गहरा और स्वाद सोंधा हो जाता है, जो इसे घर के स्वाद का अहसास देता है।
पहाड़ी तड़का: इसमें ‘जखिया’ का तड़का लगता है, जो उत्तराखंड का अपना एक खास मसाला है और यह डिश को एक अलग ही खुशबू और स्वाद देता है।
- खाने के फायदे (Health Benefits)
गहत (कुलथी) की दाल अपनी औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है:
- पथरी में लाभकारी: गहत की दाल को आयुर्वेद में गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) को गलाने और निकालने के लिए बहुत प्रभावशाली माना जाता है।
- वजन घटाने में सहायक: यह फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है, जिससे पेट काफी देर तक भरा हुआ महसूस होता है।
- पाचन और स्वास्थ्य: यह शरीर में गर्मी पैदा करती है और ठंड के मौसम में या पहाड़ी इलाकों में शरीर को अंदर से गर्म और स्वस्थ रखने में मदद करती है।
- प्रोटीन का पावरहाउस: जो लोग मांसाहार नहीं खाते, उनके लिए यह प्रोटीन का सबसे बेहतरीन स्रोत है।
“फाणू दाल सिर्फ एक स्वाद नहीं, बल्कि पहाड़ की जड़ों से जुड़ने का एक तरीका है।”
About Me
नमस्ते! मैं चेन सिंह हूँ, एक प्रोफेशनल शेफ जिसे खाने की दुनिया में नए और पारंपरिक स्वाद खोजने का शौक है। उत्तराखंड की गोद में पले-बढ़े होने के कारण, मेरी रसोई में हमेशा पहाड़ों की महक और सादगी रही है।
मेरा लक्ष्य सिर्फ खाना बनाना नहीं, बल्कि उसे सिखाना और पहाड़ी संस्कृति के अनमोल स्वादों को आप तक लाना है। चाहे वह गंगोत्री के शुद्ध जल की बात हो या हमारे पारंपरिक भोजन की, मैं हर रेसिपी को पूरी प्रामाणिकता और प्यार के साथ साझा करता हूँ।
