Pahadi Pathur Recipe इंटरनेट पर पहली बार: बेसन नहीं, दादी मां की इस सीक्रेट पहाड़ी दाल से बनाएं ‘उत्तराखंडी पाठुर’! उंगलियां चाटते रह जाएंगे सब
- क्या आपने कभी ऐसी Pahadi Pathur Recipe के बारे में सुना है जो स्वाद में तो लाजवाब है ही, लेकिन उसे बनाने का तरीका इंटरनेट के बड़े से बड़े फूड ब्लॉगर्स को भी नहीं पता?
- जब बात उत्तराखंड के पारंपरिक खाने की आती है, तो अरबी के पत्तों से बने ‘पाठुर’ (पथूड़) का नाम हर पहाड़ी की जुबान पर आ जाता है।
- लेकिन आज हम बेसन के उस घिसे-पिटे पारंपरिक तरीके को हमेशा के लिए बदलने वाले हैं। आज मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ उत्तराखंडी पथूड़ का एक ऐसा ‘सीक्रेट और अनसुना फ्यूजन अवतार’ जिसे मैंने पहाड़ों के एक छोटे से गांव की दादी मां से सीखा है।
- यकीन मानिए, गहत की दाल का सोंधापन और जखिया के तड़के का वो कड़क क्रंच… खाने वाला अपनी उंगलियां चाटने पर मजबूर हो जाएगा
इस अनोखे पहाड़ी पाठुर की खासियत (Highlights)
रेसिपी शुरू करने से पहले आइए जान लेते हैं कि इस डिश में ऐसा क्या खास है जो इसे हर घर की पसंद बना देगा
- स्वाद का नया धमाका: Pahadi Pathur Recipe इसमें पारंपरिक बेसन की जगह पहाड़ी गहत (कुलथ) की दाल का इस्तेमाल होता है, जो इसे एक अनोखा सोंधापन देती है
- अल्टीमेट क्रंच (कुरकुरापन): आम राई या जीरे को छोड़कर, हम इसमें उत्तराखंड का सीक्रेट मसाला ‘जखिया’ (Jakhiya) डालेंगे, जिससे हर बाइट में बेहतरीन क्रंच मिलेगा
- सेहत का खजाना: गहत की दाल प्रोटीन से भरपूर होती है और पहाड़ों में इसे किडनी स्टोन (पथरी) के इलाज के लिए रामबाण माना जाता है।
- नो खराश फॉर्मूला: अरबी के पत्तों से गले में होने वाली हल्की खुजली को रोकने के लिए हम इसमें पहाड़ी नींबू या अमचूर का सही इस्तेमाल करेंगे
रेसिपी का एक क्विक ओवरव्यू (Quick Overview)
- तैयारी का समय (Prep Time): 15 मिनट (दाल रातभर भीगी होनी चाहिए)
- पकाने का समय (Cooking Time): 30 से 35 मिनट
- कुल समय (Total Time): लगभग 50 मिनट
- कितने लोगों के लिए है (Servings): 4 से 5 लोग
- स्वाद (Taste Profile): एकदम क्रिस्पी, चटपटा और सोंधा
आवश्यक सामग्री (Ingredients List)
| अरबी के ताजे पत्ते: | 8 से 10 पीस (मध्यम आकार के) |
| गहत (कुलथ) की दाल: | 1 कप (इसे रातभर पानी में भिगोकर रखें) |
| चावल का आटा: | 2 बड़े चम्मच (यह पाठुर को एक्स्ट्रा कुरकुरा बनाएगा) |
| अदरक: | 1 इंच का टुकड़ा |
| लहसुन की कलियां: | 6 से 8 पीस |
| हरी मिर्च: | 3 से 4 पीस (या स्वादानुसार) |
| हरा धनिया: | एक मुट्ठी (बारीक कटा हुआ) |
| हल्दी पाउडर | 1/2 छोटा चम्मच |
| धनिया पाउडर | 1 छोटा चम्मच |
| हीगं | 1-2 चुटकी (पचाने में मददगार) |
| पहाड़ी नींबू का रस या अमचूर पाउडर: | 2 बड़े चम्मच (गले की खराश रोकने के लिए सबसे जरूरी) |
| जखिया (Jakhiya) | 1 छोटा चम्मच (तड़के और क्रंच के लिए – हमारा सीक्रेट मसाला) |
| सरसों का तेल: | तलने के लिए (पहाड़ी स्वाद सरसों के तेल में ही बेस्ट आता है) |
| नमक | स्वादानुसार |
सामग्री न मिलने पर क्या करें? (Smart Substitutes & Variations)
अगर आपके पास ऊपर बताई गई Pahadi Pathur Recipe में कुछ पहाड़ी सामग्रियां नहीं हैं, तो आप उनकी जगह इन चीज़ों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
- गहत की दाल का विकल्प: अगर आपके पास गहत की दाल नहीं है, तो आप इसकी जगह साबुत काली उड़द की दाल (Pahadi Maas) या चने की दाल को रातभर भिगोकर इस्तेमाल कर सकते हैं अगर कोई भी दाल न हो तो बेसन का इस्तेमाल करें
- जखिया का विकल्प: अगर आपको पहाड़ी जखिया न मिले, तो तड़के में सफेद तिल और राई (Mustard Seeds) का मिश्रण इस्तेमाल करें। इससे भी अच्छा क्रंच आता है
- पहाड़ी नींबू का विकल्प: वैसे तो पहाड़ों में नींबू बारामास मिलते हैं अगर न होने पर आप सफेद सिरका (Vinegar) या इमली का गाढ़ा पल्प इस्तेमाल कर सकते हैं। यह पत्तों की खुजली को पूरी तरह खत्म कर देगा
- चावल के आटे का विकल्प: अगर चावल का आटा उपलब्ध न हो, तो कुरकुरेपन के लिए आप 2 चम्मच सूजी (Rava) या कॉर्नफ्लोर का इस्तेमाल कर सकते हैं
पारंपरिक Pahadi Pathur Recipe बनाने की विधि(Step-by-Step Instructions)
- स्टेप 1: सीक्रेट दाल का पेस्ट तैयार करना
- Pahadi Pathur Recipe रातभर भीगी हुई गहत की दाल को अच्छे से धोकर उसका पूरा पानी निकाल लें
- अब मिक्सी के जार में गहत की दाल, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें
- इसमें हींग, नमक, हल्दी, धनिया पाउडर और नींबू का रस (या अमचूर) भी मिला लें
- ज़रूरी टिप: बिना पानी डाले (या सिर्फ 1-2 चम्मच पानी छिड़ककर) इसे एक गाढ़ा और हल्का दरदरा पेस्ट पीस लें। अंत में इसमें 2 चम्मच चावल का आटा मिलाकर मिक्स कर लें।
- स्टेप 2: पत्तों को तैयार करना
- Pahadi Pathur Recipe के लिए अरबी के पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर सूती कपड़े से सुखा लें

- अब एक चाकू की मदद से पत्तों के पीछे की जो मोटी नसें (veins) होती हैं, उन्हें काटकर समतल (फ्लैट) कर लें। ऐसा करने से पत्ते रोल करते समय फटेंगे नहीं

- स्टेप 3: लेयरिंग और रोल बनाने की कला
- Pahadi Pathur Recipe के लिए एक बड़ी थाली या साफ प्लेटफॉर्म पर सबसे बड़ा पत्ता उल्टा करके (यानी डार्क साइड नीचे और लाइट साइड ऊपर) रखें
- इस पत्ते पर चम्मच या हाथों की मदद से गहत दाल के पेस्ट की एक पतली परत अच्छी तरह फैलाएं
- अब इसके ऊपर दूसरा पत्ता पहली वाली दिशा के उल्टे रुख में रखें और फिर से पेस्ट लगाएं। इसी तरह 4 से 5 पत्तों की एक के ऊपर एक लेयर बना लें

- Pahadi Pathur Recipe के लिए अब पत्तों के दाएं और बाएं किनारों को थोड़ा अंदर की तरफ मोड़ें, फिर नीचे से ऊपर की तरफ दबाते हुए एक टाइट रोल (Cylinder) बना लें। आखिर में थोड़ा सा पेस्ट लगाकर रोल को चिपका दें

- स्टेप 4: पहाड़ी स्टाइल में स्टीम करना (भाप में पकाना)
- Pahadi Pathur Recipe के लिए एक बड़ी कढ़ाई में स्टैंड रखें और 2 गिलास पानी डालकर गरम करें। स्टैंड के ऊपर एक जालीदार प्लेट (जिस पर थोड़ा तेल लगा हो) रख दें
- पानी उबलने पर तैयार किए गए पत्तों के रोल्स को इस प्लेट पर रखें
- कढ़ाई को ढक दें और मध्यम आंच पर 20 से 25 मिनट तक भाप में पकने दें

- 25 मिनट बाद एक चाकू रोल के अंदर डालकर देखें, अगर चाकू साफ बाहर आता है तो इसका मतलब पाठुर (पथूड़) अंदर तक पक चुका है। अब गैस बंद करके रोल्स को पूरी तरह ठंडा होने दें
- स्टेप 5: जखिया का कड़क तड़का और फ्राई
- Pahadi Pathur Recipe के लिए जब रोल्स पूरी तरह ठंडे हो जाएं, तो चाकू से इनके गोल-गोल और थोड़े मोटे कतरन (slices) काट लें
- अब एक लोहे की कढ़ाई या तवे पर 2-3 बड़े चम्मच सरसों का तेल गरम करें
- तेल से जब धुआं निकलने लगे, तो आंच धीमी करें और उसमें जखिया (Jakhiya) डालें
- जखिया के चटकते ही पाठुर (पथूड़ )के टुकड़ों को कढ़ाई में रखें। इन्हें मध्यम आंच पर दोनों तरफ से तब तक शैलो फ्राई करें जब तक कि ये सुनहरे (Golden) और एकदम क्रिस्पी न हो जाएं।
शेफ की विशेष टिप (Chef’s Special Pro-Tips)
अगर आप चाहते हैं कि आपका पहाड़ी पाठुर (पथूड़ ) पहली ही बार में परफेक्ट, क्रिस्पी और बिना किसी खराश के बने, तो इन बातों का खास ध्यान रखें:
- पेस्ट को रखें गाढ़ा: गहत की दाल को पीसते समय पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें या सिर्फ 1 छोटा चम्मच ही डालें। अगर पेस्ट गीला हो गया, तो पत्तों पर चिपकेगा नहीं और रोल ढीला हो जाएगा
- पूरी तरह ठंडा करना ज़रूरी: भाप में पकने के बाद रोल्स को तुरंत गरम-गरम न काटें, वरना वे टूट जाएंगे। उन्हें कम से कम 15-20 मिनट के लिए पूरी तरह ठंडा होने दें, आप चाहें तो उन्हें 10 मिनट के लिए फ्रिज में भी रख सकते हैं। इससे स्लाइस बहुत सुंदर और साफ कटेंगे
- खराश से बचने का अचूक उपाय: Pahadi Pathur Recipe अरबी (पिडांलु) के पत्तों में कैल्शियम ऑक्सालेट होता है जो गले में खुजली कर सकता है। इससे बचने के लिए दाल के पेस्ट में खटाई (नींबू या अमचूर) थोड़ी अच्छी मात्रा में डालें। साथ ही, पाठुर को हमेशा सरसों के तेल में ही फ्राई करें, इससे खराश की संभावना खत्म हो जाती है
- लोहे की कढ़ाई का जादू: पारंपरिक पहाड़ी स्वाद और बेहतरीन कड़कपन पाने के लिए इन्हें हमेशा लोहे की कढ़ाई বা तवे पर ही शैलो फ्राई करें। लोहे के बर्तन में फ्राई करने से इसका रंग और क्रंच दोनों बहुत शानदार आते हैं
- स्टोर करने का तरीका: आप इन रोल्स को भाप में पकाने के बाद, बिना काटे एक एयर-टाइट डिब्बे में बंद करके फ्रिज में 3 से 4 दिनों तक सुरक्षित रख सकते हैं। जब भी खाने का मन हो, फ्रिज से निकालें, स्लाइस काटें और गरमागरम फ्राई कर लें
परोसने और खाने के बेस्ट तरीके (Perfect Serving & Pairing Guide)
इसगरमागरम और क्रिस्पी गहत दाल के पाठुर का स्वाद तब दोगुना हो जाता है, जब आप इसे सही चीज़ों के साथ परोसते हैं:
- पहाड़ी कड़क चाय के साथ (The Ultimate Combo): शाम के समय रिमझिम बारिश हो रही हो और हाथ में अदरक-इलायची वाली कड़क चाय का कुल्हड़ हो, तो उसके साथ यह क्रिस्पी पाठुर जन्नत जैसा स्वाद देता है
- भांग की चटनी (Pahadi Bhang ki Chutney): उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद को पूरा करने के लिए इसे भुने हुए भांग के दानों, पुदीने, हरी मिर्च और नींबू से बनी तीखी पहाड़ी चटनी के साथ परोसें
- लंच में साइड डिश की तरह: उत्तराखंड में लोग इसे सिर्फ स्नैक्स की तरह ही नहीं, बल्कि दोपहर के भोजन में ‘गहत की थिचोणी’ या ‘पहाड़ी कापली’ और चावल के साथ एक क्रिस्पी साइड डिश के रूप में भी चाव से खाते हैं
- हरी चटनी और सॉस: यदि आपको पहाड़ी चटनी की सामग्री न मिले, तो इसे तीखी पुदीने-धनिया की हरी चटनी या खट्टी-मीठी इमली की चटनी के साथ परोसें। बच्चे इसे टोमैटो केचप के साथ भी बहुत पसंद करते हैं
स्टोरेज और दोबारा गर्म करने का सही तरीका (Storage & Reheating Guide)
अगर आप इस अनोखे पाठुर को पहले से बनाकर रखना चाहते हैं या बचे हुए पाठुर को दोबारा फ्रेश बनाना चाहते हैं, तो इन आसान नियमों का पालन करें:
- फ्रिज में स्टोर कैसे करें? (How to Store)
- भाप वाले रोल्स (Best Method): पाठुर (पथूड़ ) को स्टोर करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप स्टेप 4 तक रोल्स को भाप में पका लें। जब रोल्स पूरी तरह ठंडे हो जाएं, तो उन्हें बिना काटे प्लास्टिक रैप या एयर–टाइट डिब्बे में बंद करके फ्रिज में रख दें। ये 3 से 4 दिनों तक बिल्कुल फ्रेश रहते हैं
- फ्राई किया हुआ पाठुर(पथूड़): अगर तड़का लगा हुआ (फ्राई किया हुआ) पाठुर बच गया है, तो उसे भी आप एयर-टाइट कंटेनर में रखकर 2 दिनों तक फ्रिज में रख सकते हैं
- दोबारा गर्म कैसे करें? (How to Reheat for Perfect Crunch)
- तवे या कढ़ाई पर (The Best Way): फ्रिज से निकाले हुए पाठुर को कभी भी माइक्रोवेव में गर्म न करें, वरना वे बिल्कुल गीले (सॉफ्ट) हो जाएंगे। बचे हुए टुकड़ों को तवे पर बिल्कुल धीमी आंच पर बिना तेल या सिर्फ आधा चम्मच तेल डालकर उलट-पुलट कर गर्म करें। इससे उनका क्रंच वापस आ जाएगा
- एयर फ्रायर में (Air Fryer Method): अगर आपके पास एयर फ्रायर है, तो आप पाठुर के टुकड़ों को 180°C पर 3-4 मिनट के लिए रीहीट कर सकते हैं। ये बिना तेल के दोबारा एकदम कुरकुरे हो जाएंगे
- फ्रेश फ्राई (फ्रीजर से निकालने पर): अगर आपने भाप वाले रोल्स को स्टोर किया था, तो फ्रिज से निकालने के बाद सीधे उनके स्लाइस काटें और गरम तेल में जखिया का तड़का देकर फ्राई कर लें। कोई बता ही नहीं पाएगा कि यह ताज़ा नहीं है!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions – FAQs)
- Q1. क्या अरबी (पिडांलू) के पत्ते खाने से गले में खराश या खुजली होना सामान्य है?
- Ans: हाँ, अरबी के पत्तों में कैल्शियम ऑक्सालेट होता है, जिसके कारण कभी-कभी गले में हल्की खुजली या खराश महसूस हो सकती है। इससे बचने के लिए दाल या बेसन के पेस्ट में नींबू का रस, अमचूर या इमली का पल्प अच्छी मात्रा में मिलाना बहुत ज़रूरी है। खट्टापन इस असर को पूरी तरह खत्म कर देता है
- Q2. गहत की दाल सेहत के लिए क्यों फायदेमंद मानी जाती है?
- Ans: गहत (कुलथ) की दाल आयरन और प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। पहाड़ों में पारंपरिक रूप से इसे किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) को पिघलाने और शरीर को अंदर से गर्म रखने के लिए रामबाण औषधि माना जाता है। वजन घटाने और शुगर कंट्रोल करने में भी यह मददगार है।
- Q3. अगर हमारे पास ‘जखिया’ न हो, तो क्या इस्तेमाल करें?
- Ans: जखिया उत्तराखंड का एक खास जंगली मसाला है जो बेहतरीन क्रंच देता है। अगर यह आपको न मिले, तो आप इसकी जगह राई (काला सरसों) और सफेद तिल को मिलाकर तड़के में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे भी बहुत बढ़िया स्वाद और कुरकुरापन आता है
- Q4. क्या हम इस रेसिपी में दाल की जगह बेसन का इस्तेमाल कर सकते हैं?
- Ans: बिल्कुल कर सकते हैं। पारंपरिक रूप से यह रेसिपी बेसन से ही बनती है। लेकिन इस ब्लॉग में बताई गई गहत की दाल का ट्विस्ट इस रेसिपी को एक अनोखा सोंधापन और एक्स्ट्रा न्यूट्रिशन देता है जो बेसन में नहीं मिलता
- Q5. पाठुर (पथूड़ )के रोल्स अंदर से कच्चे न रहें, इसके लिए क्या करें?
- Ans: इसके दो नियम हैं—पहला, दाल का पेस्ट लगाते समय पत्तों पर बहुत मोटी परत न लगाएं। दूसरा, इन्हें मध्यम आंच पर पूरे 20 से 25 मिनट तक भाप में पकने दें। पकने के बाद चाकू डालकर चेक ज़रूर करें।
Pahadi Pathur Nutrition Facts: कैलोरी, प्रोटीन, फैट और कैल्शियम की पूरी जानकारी
| कैलोरी (Calories): | लगभग 150 से 200 किलो कैलोरी (यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कितना तला गया है)। |
| प्रोटीन (Protein): | लगभग 4 से 6 ग्राम (मुख्य रूप से बेसन और अरबी के पत्तों के कारण)। |
| वसा / फैट (Fat): | लगभग 6 से 10 ग्राम (यह शैलो फ्राई या डीप फ्राई करने में इस्तेमाल तेल की मात्रा पर निर्भर करता है)। |
| कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) | लगभग 18 से 24 ग्राम। |
| फाइबर / फाइबर (Dietary Fiber) | लगभग 3 से 4 ग्राम (अरबी के पत्तों में अच्छा फाइबर होता है जो पाचन में मदद करता है)। |
| कैल्शियम (Calcium): | लगभग 40 से 60 मिलीग्राम (अरबी के पत्तों और बेसन से)। |
| आयरन (Iron) | लगभग 1.5 से 2.5 मिलीग्राम |
Pahadi Pathur Benefits and Side Effects: पाथुर खाने के फायदे और नुकसान
| पाथुर (पथूड़) खाने के फायदे: | पाथुर (पथूड़) खाने के नुकसान / सावधानियां: |
| इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर बनाता है | कच्चे या ठीक से न पके हुए अरबी के पत्तों में गले में खुजली या खराश (Itching) हो सकती है। |
| अरबी के पत्तों में आयरन और कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और खून के लिए अच्छा है। | इसे डीप फ्राई करने से कैलोरी और फैट बढ़ जाता है, जो वजन या दिल के मरीजों के लिए ज्यादा सही नहीं है |
| इसमें विटामिन ए और सी पाए जाते हैं जो आँखों और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद हैं। | जिन लोगों को जोड़ों में दर्द (यूरिक एसिड) या किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें इसे संभलकर खाना चाहिए |

उत्तराखंडी पत्यूड़ रेसिपी | Uttarakhandi Pathur Recipe
Ingredients
Method
- सीक्रेट दाल का पेस्ट तैयार करना रातभर भीगी हुई गहत (कुंवर) की दाल को अच्छे से धोकर उसका पूरा पानी निकाल लें। अब मिक्सी के जार में गहत की दाल, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें। इसमें हींग, नमक, हल्दी, धनिया पाउडर और पहाड़ी नींबू का जूस (या अमचूर) भी मिला लें। ज़रूरी टिप: बिना पानी डाले (या सिर्फ 1-2 चम्मच पानी छिड़ककर) इसे एक गाढ़ा और हल्का दरदरा पेस्ट पीस लें। अंत में इसमें 2 चम्मच चावल का आटा मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लें।
- पतो की तैयारी अरबी के पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोकर सूती कपड़े से सुखा लें। अब एक चाकू की मदद से पत्तों के पीछे की जो मोटी नसें (veins) होती हैं, उन्हें काटकर समतल (फ्लैट) कर लें। ऐसा करने से पत्ते रोल करते समय फटेंगे नहीं।
- लेयर (परतें) बनाना एक बड़ी थाली या साफ प्लेटफॉर्म पर सबसे बड़ा पत्ता उल्टा करके (यानी डार्क साइड नीचे और लाइट साइड ऊपर) रखें। इसके ऊपर गहत औकर चावल के आटे का गाढ़ा पेस्ट लगाएं। अब इसके ऊपर दूसरा पत्ता पहली वाली दिशा के उल्टे रुख में रखें और फिर से पेस्ट लगाएं। इसी तरह 4 से 5 पत्तों की एक के ऊपर एक लेयर बना लें।
- टाइट रोल बनाना अब पत्तों के दाएं और बाएं किनारों को थोड़ा अंदर की तरफ मोड़ें, फिर नीचे से ऊपर की तरफ दबाते हुए एक टाइट रोल (Cylinder) बना लें। आखिर में थोड़ा सा पेस्ट लगाकर रोल को अच्छी तरह चिपका दें ताकि वह खुले नहीं।
- भाप (Steam) में पकाना। एक बड़ी कढ़ाई में स्टैंड रखें और 2 गिलास पानी डालकर गरम करें। स्टैंड के ऊपर एक जालीदार प्लेट (जिस पर थोड़ा तेल लगा हो) रख दें। पानी उबलने पर तैयार किए गए पत्तों के रोल्स को इस प्लेट पर रखें। कढ़ाई को ढक्कन से ढककर मध्यम आंच पर 15-20 मिनट तक भाप में पकने दें।
- जखिया का कड़क तड़का और फ्राई जब रोल्स भाप में अच्छी तरह पक जाएं, तो उन्हें बाहर निकालकर पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद एक तेज चाकू से इन्हें आधे इंच के गोल टुकड़ों (पत्यूड़) में काट लें। अब एक लोहे की कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करें और उसमें जख्या का तड़का लगाएं। जखिया के चटकते ही पाठुर (पथूड़) के टुकड़ों को कढ़ाई में रखें। इन्हें मध्यम आंच पर दोनों तरफ से तब तक शैलो फ्राई करें जब तक कि ये सुनहरे (Golden) और एकदम क्रिस्पी न हो जाएं। गरमा-गरम पत्यूड़ को पुदीने की चटनी या पहाड़ी पिसे नमक के साथ परोसें।
Notes
निष्कर्ष (Conclusion)
- उत्तराखंड का पारंपरिक खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि सेहत और स्वाद का एक अनोखा विज्ञान है।
- पारंपरिक ‘पाठुर’ में गहत की दाल और जखिया का यह नया ट्विस्ट इस बात का सबूत है कि हम अपनी पुरानी विरासत को बिना भूले उसे एक मजेदार और मॉडर्न रूप दे सकते हैं।
- यह रेसिपी बाहर से जितनी कुरकुरी और चटपटी है, अंदर से उतनी ही सेहतमंद भी है। जब आप इसे गरमागरम चाय के साथ अपने परिवार या दोस्तों के सामने परोसेंगे, तो हर कोई आपकी कुकिंग स्किल का दीवाना हो जाएगा।
- तो फिर देर किस बात की? इस वीकेंड इस अनोखी पहाड़ी रेसिपी को अपने किचन में ज़रूर आज़माएं!
- आपसे एक छोटा सा सवाल (Let’s Chat!)
- क्या आपने पहले कभी उत्तराखंडी खाना या जखिया का तड़का चखा है?
- आपको बेसन की जगह गहत की दाल का यह अनोखा ट्विस्ट कैसा लगा?
मुझे नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर ज़रूर बताएं! अगर आपको यह रेसिपी पसंद आई हो, तो इसे अपने फूडी दोस्तों और सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर करना बिल्कुल न भूलें। हैप्पी कुकिंग
अगर आपको यह पहाड़ी रेसिपी पसंद आई है, तो हमारी दूसरी [Gahat dal recipe in Hindi] भी ज़रूर ट्राई करें जो इसके साथ बहुत अच्छी लगती है।”
Chef chain singh 🙏
Uttarakhand Pure Products: जल्द मंगा सकेंगे उत्तरकाशी का गंगाजल और पहाड़ी दालें
नमस्कार दोस्तों! हमारी कोशिश हमेशा से यही रहती है कि आप तक उत्तराखंड की संस्कृति और शुद्धता से जुड़ी सही जानकारी पहुँचाई जाए। बहुत जल्द हम आपके लिए देवभूमि उत्तराखंड के खेतों से सीधे शुद्ध पहाड़ी दालें (जैसे गहत, भट्ट, राजमा) और माँ गंगा के उद्गम स्थल उत्तरकाशी का पवित्र गंगाजल ऑनलाइन उपलब्ध कराने जा रहे हैं। अगर आप भी एकदम शुद्ध और प्राकृतिक पहाड़ी उत्पादों का स्वाद लेना चाहते हैं या मंगाना चाहते हैं, तो हमारे साथ जुड़े रहें।”
